तेरे चंद्र चपल, चंचल मुखड़े ंपर मैं गीत लिखा करता हूं।
मैं नील गगन का उन्मुक्त भ्रमर,
तेरे इठलाते-इतराते यौवन पर,
अपने अनगढ़ अक्षर से खट्टे-मीठे प्रीत लिखा करता हूं।
मैं नील गगन का उन्मुक्त भ्रमर,
तेरे इठलाते-इतराते यौवन पर,
अपने अनगढ़ अक्षर से खट्टे-मीठे प्रीत लिखा करता हूं।
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