Thursday, 17 April 2014

Poonam singh ki rachana

कभी सोचती हूँ मैं..
न ये आदम होता,न ये हव्वा होती,
न ये जन्नत होती, न ये दोज़ख होती,
न तो शैतानियत आती,न तो इंसानियत जाती।
कभी सोचती हूँ मैं.....
न ये पेट होता, न ये खुराक होती,
न ये पानी होता,न ये प्यास होती,
न तो रोटी होती, न तो भूख होती,
कभी सोचती हूँ मैं..
न ये लङकी होती, न ये औरत होती,
न ये लालच होता, न ये वहशत होती,
न तो बहुऐं जलती, न तो बेटीयाँ लुटती,
कभी सोचती हूँ मैं..
न तो तू होता, न तो मैं होती,
न तू मुझसे मिलता,न मैं तुझसे मिलती,
न तू आबाद होता,न मैं बरबाद होती,
कभी सोचती हूँ मैं..

पूनम सिंह

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